फिर हाल ही में अभिनेत्री हुमा कुरैशी के साथ भी बाबिल का एक वीडियो वायरल हुआ था. जिसमें अभिनेता बाबिल और अभिनेत्री हुमा कुरैशी के बीच कैमरे के सामने एक असहज बातचीत होती दिखती है.
वीडियो में बाबिल एक टूटे हुए, उलझे हुए नौजवान की तरह हुमा से सवाल करते हैं, “उसने मेरा फ़ोन भी नहीं उठाया?” हुमा जवाब देने से बचती हैं, कहती हैं- “इस बारे में हम बाद में बात करेंगे.”
मगर बाबिल रुकते नहीं और एक बार फिर मासूम-सी बेचैनी में पूछते हैं, “क्या वो मुझसे ग़ुस्सा है?” हुमा थोड़ी असहज होकर कहती हैं—”मुझे नहीं पता.”
फिर तेज़ी से आगे बढ़ जाती हैं और माइक से दूर जाकर कहती हैं, “इस लड़के को थप्पड़ मारने का मन करता है.” वीडियो में जो सबसे ज़्यादा ध्यान खींचता है, वो है बाबिल की निजी हताशा का सार्वजनिक रूप से छलकना.
कैमरे के सामने ये संवाद एक ऐसे अभिनेता की तस्वीर पेश करते हैं, जो भावुक दिखता है.
और फिर आया रविवार का ये वायरल इंस्टाग्राम वीडियो जहां बाबिल फूट-फूटकर रोते नज़र आए.
बाबिल के वीडियो के वायरल होने के बाद अनन्या पांडे और राघव जुयाल ने बाबिल के सपोर्ट में पोस्ट की तो अभिनेता हर्षवर्धन राणे ने उन्हें नशे और हर आफ्टर पार्टीज़ से दूर रहने की सलाह दी.
मगर बाबिल की हालत इशारा करती है कि यह सिर्फ़ एक वायरल वीडियो नहीं, एक संकेत है कि बाबिल मदद मांग रहे हैं. लेकिन ये मदद जो सोशल मीडिया की लाइक्स या कमेंट्स से नहीं मिल सकती. बल्कि पेशेवर काउंसलरों, संवेदनशील सहयोगियों और निजी स्पेस में ही मिल सकती है. परिवार और उनकी टीम की प्राथमिकता सबसे पहले यही होनी चाहिए.
क्या ये बेहतर नहीं होगा कि बाबिल को फ़िल्मों की तेज़ रफ्तार दौड़ से कुछ देर के लिए अलग होकर ख़ुद को सहेजने का मौका मिलना चाहिए? एक ठहराव, जो उनके करियर के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि उनके इंसान बने रहने के लिए ज़रूरी है.